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पवार समाज के 72 गोत्र की पूरी लिस्ट 2026 + गोत्र अनुसार विवाह गाइड | ParamSaathi

पवार/पंवार समाज के सभी 72 मूल गोत्रों की सम्पूर्ण सूची 2026 — मालवा से सतपुड़ा तक गोत्रों का इतिहास। अपना गोत्र खोजें, मिलान करें और निःशुल्क गोत्र अनुकूलता जांच करें।

राजेश बारंगे पवार (संपादित: ParamSaathi टीम)Editorial Team
June 30, 2026 10 min read
📖 शोध आधार: यह गोत्र सूची राजेश बारंगे पवार (Founder, माँ ताप्ती शोध संस्थान, मुलताई, बैतूल) के दशकों के शोध और ऐतिहासिक दस्तावेजों पर आधारित है। पवारी शोध पत्रिका में प्रकाशित — rajeshbarange.blogspot.com
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राम-राम भाइयों और बहनों! हमारे पवार (भोयर पवार / क्षत्रिय पवार / पंवार) समाज का इतिहास अत्यंत गौरवशाली और समृद्ध रहा है। जब भी हम समाज के भीतर किसी रिश्ते की बात करते हैं, तो सबसे पहले मन में एक ही सवाल आता है—"आपका गोत्र क्या है?" या "मामा का गोत्र क्या है?"

गोत्र केवल एक उपनाम या सरनेम नहीं है, बल्कि यह हमारे पूर्वजों की विरासत, हमारे कुल की पहचान और हमारे वैज्ञानिक वंशानुक्रम (genetic lineage) का प्रतीक है। आज के इस विशेष लेख में, हम हमारे आदरणीय समाज चिंतकों और शोधकर्ताओं (विशेष रूप से राजेश बारंगे पंवार मां ताप्ती शोध संस्थान, मुलताई) के अथक प्रयासों और ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर समाज के 72 मूल गोत्रों और समय के साथ बने उनके अपभ्रंश (वेरिएंट्स) के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।

क्या आप जानते हैं?
हमारे बुजुर्गों का मानना है कि पवार समाज के मूल रूप से 72 कुल (गोत्र) ही हैं। इसके अतिरिक्त दिखने वाले कुछ उपनाम वास्तव में इन्हीं 72 गोत्रों के क्षेत्रीय उच्चारण और मराठी या अंग्रेजी प्रभाव के कारण बने अपभ्रंश हैं।

पवार समाज में गोत्र और विवाह के नियम (Rule of 4 Gotras)

हमारे समाज में विवाह संबंध तय करते समय आपसी रक्त संबंधों से बचने और आने वाली पीढ़ी के बेहतर स्वास्थ्य (Genetics) के लिए चार गोत्रों को टालने (Char Gotra Talna) की परंपरा सदियों से चली आ रही है। विवाह के समय वर और वधू पक्ष में निम्नलिखित चार गोत्रों का आपस में मेल नहीं होना चाहिए:

  1. स्वयं का गोत्र (पिता का गोत्र)
  2. माता का गोत्र (मामा का गोत्र)
  3. दादी का गोत्र (पिता की माता का गोत्र)
  4. नानी का गोत्र (माता की माता का गोत्र)

इन चार गोत्रों को टालने से यह सुनिश्चित होता है कि वर और वधू के बीच कोई निकट पारिवारिक संबंध नहीं है, जो कि चिकित्सा विज्ञान (Genetics) की दृष्टि से भी संतान के अनुवांशिक स्वास्थ्य के लिए बहुत आवश्यक माना गया है।

हमारे उपनाम (Surnames) क्यों और कैसे बदले?

अक्सर देखा गया है कि एक ही मूल गोत्र के लोग अलग-अलग सरनेम का उपयोग करते हैं। जैसे बारंगिया गोत्र के लोग खुद को बारंगे, बारंगा, या बारंग्या लिखते हैं। ऐसा होने के पीछे मुख्य रूप से चार कारण रहे हैं:

  • मालवा से सतपुड़ा प्रवास (Migration): 16वीं से 18वीं शताब्दी के दौरान जब हमारे पूर्वज मालवा (राजस्थान, गुजरात व सिंध से होते हुए) से निकलकर सतपुड़ा के क्षेत्रों (मप्र के बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और महाराष्ट्र के नागपुर, वर्धा) में आकर बसे, तो स्थानीय बोलियों (पवारी/भोयरी) के प्रभाव से उच्चारण बदल गए।
  • मराठी भाषा का प्रभाव (Marathi Influence): महाराष्ट्र और विदर्भ क्षेत्र की सीमा से लगे होने के कारण नामों में मराठी शैली का समावेश हुआ, जिससे नामों के अंत में 'या' की जगह 'ए' या 'कर' जुड़ा (जैसे भादिया से भादे या भादेकर)।
  • अंग्रेजी स्पेलिंग (English Transliteration): ब्रिटिश शासन के दौरान स्कूल के रजिस्टरों या सरकारी दस्तावेजों में अंग्रेजी में लिखते समय स्पेलिंग में बदलाव आ गए।
  • भाषाई सरलीकरण (Linguistic Simplification): बोलने में आसानी के लिए बड़ी स्पेलिंग वाले नामों को छोटा कर दिया गया (जैसे बड़नगरिया से बडनगरे या नागरे)।

पवार (भोयर पवार) समाज के 72 मूल गोत्र एवं वेरिएंट्स की पूरी सूची

नीचे दी गई सूची में समाज के सभी 72 गोत्रों, उनके प्रचलित उपनामों और बदलाव के कारणों को दर्शाया गया है। मोबाइल पर यह सूची कार्ड के रूप में और कंप्यूटर पर एक व्यवस्थित तालिका के रूप में दिखाई देगी:

क्र. मूल गोत्र (Original Gotra) प्रचलित वेरिएंट्स / सरनेम (Surnames) परिवर्तन का प्रकार / विवरण
1 बारंगिया बारंग्या, बारंगा, बारंगे मराठी प्रभाव (‘–या’ → ‘–गा’/‘–गे’)
2 बागवान भोयर, भुईहार सामाजिक उपनाम / व्यवसाय सूचक
3 बोगाना बैंगने, बोगा भौगोलिक प्रवास (‘गाना’ → ‘गने’)
4 बरखेड़िया बरखाड्या, बरखेडे, बरखाडे मराठी प्रभाव (‘–ड़िया’ → ‘–ड्या’/‘–डे’)
5 बारबुहारा बारबुहारे संक्षेपण (‘–हारा’ → ‘–हारे’)
6 बड़नगरिया बड़नगरया, बडनगरे, बन्नगरे, नागरे लिप्यंतरण, भाषाई सरलीकरण
7 भादिया भादय्या, भादया, भादे, भादेकर क्षेत्रीय उच्चारण (‘–या’ → ‘–ए’ / ‘कर’)
8 बोबाटे भोभाट, भोभटकर, बोभाट, बोभाटकर मराठी प्रभाव (‘–बटिया’ → ‘–बट’ / ‘कर’)
9 बोबड़ा बोबड्या, बोबड़े, बोबाड़े लिप्यंतरण (‘–ड़ा’ → ‘–डे’)
10 बुहाड़िया बुवाड्या, बोवाड्या, बुआड्या, भोहाड्या, बुवाडे, बोवाड़े, बोआड़े, भोहाडे भाषाई सरलीकरण
11 बरगाड़िया बिरगड्या, बिरगड़े, बिरगाड़े, बिरखाड़े, वीरगाड़े, वीरखाड़े, वीरखड़े, बिडगड़े, बिसेन सामाजिक अनुकूलन / बिसेन
12 चोपड़िया चोपड्या, चोपड़े, चोपड़ा, चोपाडे मराठी प्रभाव (‘–ड़िया’ → ‘–डे’)
13 चौधरी चौधरी स्थिर (कोई परिवर्तन नहीं)
14 चिकानिया चिकनिया, चिकन्या, चिकान्या, चिकने, चिकाने, चनखार, चनखर, चकनार, चखनर क्षेत्रीय उच्चारण (‘–निया’ → ‘–ने’)
15 ढुंढारिया डंडारे, डंढारे, डंडाले, दंडाले सामाजिक अनुकूलन
16 डालू डालू, डाला, डहारे, डाले, डकारे लिप्यंतरण (‘–लू’ → ‘–ला’/‘–ले’)
17 देवासिया देवास्या, देवासे संक्षेपण (‘–सिया’ → ‘–से’)
18 देशमुख देशमुख स्थिर (कोई परिवर्तन नहीं)
19 धारफोड़िया धारपुरे, धारे, धारफोड़े लिप्यंतरण, क्षेत्रीय उच्चारण
20 ढोटा ढोटया, धोटे, ढोटे संक्षेपण (‘–टा’ → ‘–टे’)
21 ढोंडी ढोंडी स्थिर (कोई परिवर्तन नहीं)
22 ढोबारिया ढोबारया, डोबारया, ढोबले, ढोबाले, ढोबारे, डोबले, डोबाले, डोबारे क्षेत्रीय उच्चारण
23 ढोलिया ढोल्या, ढोले संक्षेपण (‘–लिया’ → ‘–ले’)
24 डिगरसिया डिगरस्या, डिगरसे, डिग्रसे, दीग्रसे लिप्यंतरण (‘–सिया’ → ‘–से’)
25 डोंगरदिया डोंगरया, डोंगरदिए, डोंगरे, डोंगरदेव, डोंगरकर प्रवास, मराठी प्रभाव
26 दुखी दुर्वे, दु:खी, दुख्खे क्षेत्रीय उच्चारण (‘–खी’ → ‘–खे’/‘दुर्वे’)
27 फरकाड़िया फरकाड्या, फरकाड़े, फरकासे, फरखासे, फरकसें सामाजिक अनुकूलन
28 गाड़किया गाखरें, गाकरें संक्षेपण (‘–किया’ → ‘–खरे’/‘–करे’)
29 गागरिया गाडगे, गागरे, आगरे, गागड़े मराठी प्रभाव (‘–रिया’ → ‘–गे’/‘–ड़े’)
30 गाडरी गाडरया, गडरे, गधड़े, गद्रे, गादड़े, गाडरे, काटोले, काटवले लिप्यंतरण, स्थानीय ध्वनि
31 घागरे घागरे स्थिर (कोई परिवर्तन नहीं)
32 गिरहारिया गिरहारया, गिरहारे, गिरारे, गिराले, गुसाई क्षेत्रीय उच्चारण
33 गोंदिया गोंदिया अपेक्षाकृत स्थिर (लिप्यंतरण)
34 गोहितिया गोहित्या, गोहिते, गोहते, गोयरे, गोहिता, गोहाटे, गोयते मराठी प्रभाव
35 गोरिया गोरया, गोरे संक्षेपण (‘–रिया’ → ‘–रे’)
36 हजारिया हजारया, हजारे क्षेत्रीय उच्चारण
37 हिंगवा हिंगवे लिप्यंतरण (‘–वा’ → ‘–वे’)
38 कालभोर कालभूतन्या, कालभूत, कालभौर सामाजिक अनुकूलन
39 करदातिया करदात्या, करदाते, दाते संक्षेपण (‘–तिया’ → ‘–ते’)
40 कड़वा कड़वे, कड़वेकर, कड़ू, कड़ूकर लिप्यंतरण (‘–वा’ → ‘–वे’)
41 कामड़ी कामड़ी स्थिर (कोई परिवर्तन नहीं)
42 कसाई कासलीकर, कसारे, कास्लेकर, खसारे, केसलीकर मराठी प्रभाव (‘–ई’ → ‘–आरे’)
43 खौसी खौसे, खवसे, खवासे, कौशिक, खवंशिक, खवसकर सामाजिक अनुकूलन
44 खपरिया खपरया, खापरे, खपरे, खपरिए संक्षेपण (‘–रिया’ → ‘–रे’)
45 खरगोसिया खारफुसे, खुसखुसे, खरफसे, खारखुसे, खारखुसा, खरखुसे, खनखुसरे लिप्यंतरण, स्थानीय उच्चारण
46 किरिंजकर किरंजकर, करंजकर लिप्यंतरण (‘–झकर’ → ‘–जकर’)
47 किनकर किनेकर, किंकर संक्षेपण (सरल रूपांतरण)
48 कोड़िलिया कोड़ल्या, कोड़ले, कोरडे मराठी प्रभाव (‘–लिया’ → ‘–ल्या’)
49 लबाड़ लबाड़, लबडे संक्षेपण (‘–आड़’ → ‘–डे’)
50 लावरी लावरी स्थिर (कोई परिवर्तन नहीं)
51 लाडकिया लाडके संक्षेपण (‘–किया’ → ‘–के’)
52 लोखंडिया लोखंड्या, लोखंडे लिप्यंतरण (‘–क्रिया’ → ‘–डे’)
53 माटिया माट्या, माटे संक्षेपण (‘–टिया’ → ‘–टे’)
54 मानमोड़िया मानमोड्या, मानमोड़े, मानमुड़े क्षेत्रीय उच्चारण
55 मुनी मुन्ने, मुने संक्षेपण (‘–नी’ → ‘–ने’)
56 नाड़ीतोड़ नाड़ीतोड़ स्थिर (कोई परिवर्तन नहीं)
57 उकार उकार, ओंकार, ओमकार लिप्यंतरण (‘उ’ → ‘ओ’)
58 पठाडिया पठाड्या, पठाडे, राखड़े लिप्यंतरण (‘–डिया’ → ‘–डे’)
59 पड़ीयार परिहार, पराड़कर, पराड़, पड्याड़, पड़ीहाड़, पड़ीमार, प्रतिहार दस्तावेज़ी त्रुटियाँ
60 पाठा पाठे, पाठेकर, पथे संक्षेपण (‘–ठा’ → ‘–ठे’)
61 पिंजारा पिंजारया, पिंजारे, पिंजरकर, पिंजरा सामाजिक अनुकूलन
62 रावत रावत, राऊत लिप्यंतरण (‘a’ → ‘au’)
63 रबड़िया रबड्या, रबड़े, राबड़े संक्षेपण (‘–ड़िया’ → ‘–ड़े’)
64 रमधम रमधमे लिप्यंतरण (‘–धम’ → ‘–धमे’)
65 रोलकिया रोडल्या, रोडले मराठी प्रभाव (‘–किया’ → ‘–कले’)
66 सरोदिया सरोदया, सरोदे, सरोदा संक्षेपण (‘–दिया’ → ‘–दे’)
67 सवाई सवाई स्थिर (कोई परिवर्तन नहीं)
68 शेरकिया शेरक्या, शेरके, छेरके क्षेत्रीय उच्चारण
69 टावरी ठवरी, ठवरे, ठवले सामाजिक अनुकूलन
70 ठुस्सी ठुस्सी स्थिर (कोई परिवर्तन नहीं)
71 टोपरिया टॉपल्या, टोपले, टोपर प्रवास, भाषाई सरलीकरण
72 उकड़लिया उकड़ल्या, उकड़ले, उधड़े, उकंडे, उकड़ते, उकर्ले, उघड़े क्षेत्रीय उच्चारण, लिप्यंतरण

नोट: कुकहीके, भुसारी, पेंधें, और भोंगाड़े भी पवार समाज में प्रचलित हैं, जिन्हें इन्हीं 72 गोत्रों में से किसी का अपभ्रंश माना जाता है। हालांकि इनका मूल गोत्र क्या है, इस पर वर्तमान में शोध जारी है।

निष्कर्ष (Conclusion)

अपने गोत्र और कुल की पहचान बनाए रखना केवल इतिहास को याद रखना नहीं है, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़े रहना है। हमारे आदरणीय इतिहासकारों और समाजसेवियों के इस ऐतिहासिक शोध को सहेजकर रखना हमारा कर्तव्य है।

हमें गर्व है कि हम इस गौरवशाली पवार (भोयर पवार) समाज का हिस्सा हैं, जो आधुनिकता के साथ-साथ अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेजकर आगे बढ़ रहा है।

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ऐतिहासिक संदर्भ (References)

1. पवार कुल दर्शन (1984) - कृष्णराव बालाजी पवार, 'पवार संदेश', नागपुर।
2. पवार समाज: एक सिंहावलोकन (1984) - डॉ. ज्ञानेश्वर टेम्भरे, 'पवार संदेश', नागपुर।
3. बैतूल जिले की जन बोलियों का भाषावैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक अध्ययन (1995) - डॉ. मंजू अवस्थी।
4. Surnames in Pawar Community (2017) - राजेश बारंगे पवार (https://rajeshbarange.blogspot.com/)।
5. Kshatriya Pawar (72 Clan): Journey from Malwa to Satpura (2024) - राजेश बारंगे पवार, लैम्बर्ट पब्लिशिंग।

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