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Pawar Samaj Vivah Sanskar Ritual Guide

पवार समाज विवाह संस्कार की पूरी जानकारी — हल्दी से लेकर सप्तपदी तक। Complete guide to Pawar wedding rituals.

ParamSaathi Editorial TeamEditorial Team
July 2, 2026 12 min read

Pawar Samaj Vivah Sanskar — A Sacred Journey

विवाह हिंदू संस्कारों में सबसे पवित्र संस्कार माना जाता है। पवार समाज (Kshatriya Pawar, Panwar, Bhoyar Pawar) में विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों, दो गोत्रों और दो परंपराओं का मिलन है।

मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के पवार समाज में विवाह संस्कार अत्यंत विधिपूर्वक और भाव-विभोर करने वाले होते हैं। इस गाइड में हम पवार समाज के विवाह संस्कार की हर रस्म की विस्तृत जानकारी देंगे।

विवाह से पहले (Pre-Wedding Rituals)

1. गोत्र मिलान — सबसे पहला कदम

विवाह के किसी भी संस्कार से पहले गोत्र मिलान अनिवार्य है। पवार समाज में सगोत्र विवाह वर्जित है। दोनों के पिता का गोत्र और माता के मायके का गोत्र अलग होना चाहिए। पवार समाज के 72 मान्य गोत्रों में से ही विवाह होता है।

2. कुंडली मिलान

गोत्र मिलान के बाद ज्योतिष द्वारा कुंडली मिलान किया जाता है। 36 गुणों में से कम से कम 18 गुण मिलने पर विवाह शुभ माना जाता है। नाड़ी दोष और मंगल दोष भी देखे जाते हैं।

3. सखरपुडा / सगाई (Sakharpuda — Engagement)

सखरपुडा वह रस्म है जब दोनों परिवार आधिकारिक रूप से एक-दूसरे के बन जाते हैं। इसमें मिसरी/चीनी का आदान-प्रदान, अंगूठी पहनाना और उपहारों का आदान-प्रदान होता है। यह रिश्ते की मिठास और पुष्टि का प्रतीक है।

4. विवाह मुहूर्त निकालना

सखरपुडा के बाद विद्वान ज्योतिषाचार्य से विवाह मुहूर्त निकलवाया जाता है। शुभ तिथि, नक्षत्र, वार और लग्न देखकर विवाह की तारीख तय होती है।

5. केलवण (Kelvan)

केलवण एक सामूहिक धार्मिक आयोजन है जो विवाह से पहले आयोजित होता है। परिवार के करीबी लोग और सुहागिन महिलाएं (Suhasini) इकट्ठा होती हैं, देवी-देवताओं की पूजा होती है और पवित्र भोजन का आयोजन होता है। यह कुलदेवता और पूर्वजों का आशीर्वाद लेने की परंपरा है।

6. हल्दी चढ़ाना / हलद (Halad — Haldi Ceremony)

हलद (हल्दी की रस्म) विवाह से एक-दो दिन पहले होती है।

  • केवल सुहागिन महिलाएं (जिनके पति जीवित हों) हल्दी चढ़ाती हैं।
  • वर और वधू के घर पर अलग-अलग हल्दी की रस्म होती है।
  • हल्दी लगाने से शरीर पवित्र होता है और त्वचा में निखार आता है।
  • इस रस्म के बाद वर/वधू को घर से बाहर नहीं जाना चाहिए।

7. मेहंदी (Mehendi)

विवाह की पूर्व संध्या पर वधू के हाथों और पैरों में मेहंदी लगाई जाती है। मेहंदी का रंग जितना गहरा होता है, माना जाता है कि पति का प्रेम उतना ही गहरा होगा।

विवाह के दिन (Wedding Day Rituals)

8. पूजा और श्री गणेश पूजन

विवाह के दिन की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से होती है। विघ्नहर्ता गणेश जी का आशीर्वाद लिए बिना कोई शुभ कार्य शुरू नहीं होता।

9. वर का श्रृंगार (Groom's Preparation)

वर (दूल्हा) शेरवानी या पारंपरिक पोशाक पहनता है। पगड़ी बांधी जाती है। माँ और बड़ों का आशीर्वाद लिया जाता है।

10. बारात (Baraat — Groom's Procession)

वर के परिवार और रिश्तेदार बारात निकालते हैं। बैंड-बाजा और ढोल-ताशे के साथ वर विवाह स्थल पर आता है। पवार समाज में बारात बहुत उत्साह के साथ मनाई जाती है।

11. वर पूजन / स्वागत (Var Pujan)

जब बारात विवाह स्थल पर आती है, वधू की माँ वर पूजन करती है। वर के माथे पर तिलक लगाया जाता है, आरती उतारी जाती है और नारियल से स्वागत किया जाता है।

12. जयमाला (Jaimala — Garland Exchange)

वर और वधू एक-दूसरे को जयमाला (फूलों की माला) पहनाते हैं। यह एक-दूसरे को जीवनसाथी के रूप में स्वीकार करने का प्रतीक है।

13. अंतरपट (Antarpat — The Sacred Curtain)

अंतरपट महाराष्ट्र और पवार समाज की विवाह की सबसे विशेष रस्म है। वर और वधू के बीच एक सफेद रेशमी कपड़ा पकड़ा जाता है। इस समय पंडित जी मंगलाष्टक (आठ मंगल श्लोक) पढ़ते हैं। जैसे-जैसे श्लोक पढ़े जाते हैं, परिवार के सदस्य वर-वधू पर अक्षत (चावल) डालते हैं। शुभ मुहूर्त में अंतरपट हटाया जाता है और वर-वधू पहली बार एक-दूसरे को जीवनसाथी के रूप में देखते हैं।

14. मंगलाष्टक (Mangalashtaka)

मंगलाष्टक विवाह का सबसे पवित्र और भावपूर्ण क्षण होता है। ये आठ संस्कृत श्लोक विवाह को दिव्य आशीर्वाद देते हैं। परिवार के बड़े-बूढ़े इस समय भाव-विभोर हो जाते हैं।

15. सप्तपदी (Saptapadi — Seven Sacred Steps)

अग्नि के सात फेरे विवाह का सबसे महत्वपूर्ण संस्कार है। सात फेरों के सात वचन:

  1. अन्न और भोजन के लिए
  2. शक्ति और साहस के लिए
  3. धन और समृद्धि के लिए
  4. सुख-शांति के लिए
  5. संतान के लिए
  6. दीर्घायु के लिए
  7. मित्रता और प्रेम के लिए

सातवें फेरे के बाद विवाह विधिपूर्वक संपन्न हो जाता है।

16. मंगलसूत्र बंधन

वर, वधू के गले में मंगलसूत्र बांधता है। यह विवाहित जीवन और सुहाग का प्रतीक है।

17. सिंदूर दान

वर, वधू की मांग में सिंदूर भरता है। यह उसे सौभाग्यवती घोषित करता है।

विवाह के बाद (Post-Wedding Rituals)

18. विदाई (Vidai — Farewell)

विवाह के बाद विदाई की रस्म होती है — वधू का मायके से ससुराल जाने का वह भावपूर्ण क्षण। वधू अपने माता-पिता और भाई-बहनों से विदाई लेती है।

19. गृहप्रवेश (Griha Pravesh)

जब वधू पहली बार ससुराल आती है, गृहप्रवेश की रस्म होती है। वह घर की देहरी पर कलश का अभिषेक करती है, चावल की पोटली को पैर से ढकेलती है और घर में प्रवेश करती है।

20. सत्यनारायण पूजा

विवाह के बाद भगवान विष्णु की सत्यनारायण पूजा की जाती है — शादी के सफल होने का धन्यवाद और नए जीवन का आशीर्वाद।

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