📖 शोध आधार: यह लेख राजेश बारंगे पवार (माँ ताप्ती शोध संस्थान, मुलताई), वल्लभ डोंगरे (सतपुड़ा संस्कृति संस्थान, भोपाल) और समाज के वरिष्ठ साहित्यकारों के शोध पर आधारित है।
ताप्ती — पवार समाज की आत्मा
पवार समाज के लिए माँ ताप्ती केवल एक नदी नहीं है — वह हमारी संस्कृति, हमारी आस्था और हमारी पहचान है। ताप्ती नदी का उद्गम मुलताई (Multai), बैतूल जिला, मध्य प्रदेश में है — और यही वह पवित्र स्थान है जो पवार समाज के सांस्कृतिक और शोध का केंद्र भी है।
"ताप्ती वाक है। असत से सत, तमस से ज्योति, अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाने वाले मार्ग का निर्देश करती है। ताप्ती काव्य है, इसमें रामायण-सा औदात्य और महाभारत-सा विस्तार है।"
साहित्यकार वल्लभ डोंगरे की इन पंक्तियों में ताप्ती की वह छवि है जो हर पवार के मन में बसी है — "ताप्ती केवल धरती के भूगोल में ही नहीं बहती, वह जन-जन के अंतस में भी बहती है। वह अंतःसलिला है।"
मुलताई — ताप्ती का उद्गम और पवार समाज का केंद्र
🏛️ मुलताई का महत्व
- ✨ ताप्ती नदी का उद्गम स्थल — यहीं से ताप्ती का जन्म होता है
- ✨ माँ ताप्ती शोध संस्थान — राजेश बारंगे पवार द्वारा स्थापित, पवार समाज के इतिहास और पवारी भाषा के संरक्षण का केंद्र
- ✨ पवारी शोध पत्रिका का प्रकाशन केंद्र — यहाँ से पवार समाज पर पीयर-रिव्यूड शोध पत्र प्रकाशित होते हैं
- ✨ बैतूल जिले का सांस्कृतिक हृदय — जहाँ भोयरी/पवारी बोली सबसे शुद्ध रूप में बोली जाती है
कार्तिक मेला — ताप्ती किनारे की सामूहिक आस्था
प्रतिवर्ष कार्तिक माह (अक्टूबर-नवम्बर) में ताप्ती नदी के किनारे लगने वाले मेले पवार समाज की सामूहिक आस्था का सबसे बड़ा प्रतीक हैं। यह मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है — यह पवार समाज के लोगों का मिलन स्थल भी है जहाँ:
- रिश्तेदारी और पारिवारिक मेल-मिलाप होता है
- पवारी लोकगीत गाए जाते हैं
- समाज के बड़े-बुजुर्गों से आशीर्वाद लिया जाता है
- विवाह योग्य युवाओं के रिश्तों की बात चलती है (पारंपरिक Parichay Sammelan)
ताप्ती संस्कृति — सतपुड़ा की विरासत
ताप्ती नदी के किनारे बसे पवार समाज ने एक विशिष्ट सतपुड़ा संस्कृति विकसित की है। इस संस्कृति की विशेषताएं:
🎵 लोकगीत (Lokgeet)
भोयरी/पवारी में गाए जाने वाले विवाह गीत, फसल गीत और त्योहार गीत — ये सभी समाज की मौखिक परंपरा का हिस्सा हैं।
🙏 हवन परंपरा
पवार समाज में हवन का विशेष महत्व है। विवाह, गृह प्रवेश और पूजा में हवन अनिवार्य अंग है।
🌿 प्रकृति पूजन
सतपुड़ा क्षेत्र के पवार समाज ने पीढ़ियों से वनों, नदियों और पर्वतों को पूजनीय माना है।
👨👩👧👦 सामूहिक विवाह
पवार समाज में सामूहिक विवाह (Mass Wedding) की परंपरा है — विशेषतः खैरीपेका (छिंदवाड़ा) में 2007 से लगातार आयोजन हो रहा है।
ताप्ती और विवाह — पवार समाज की परंपरा
पवार समाज में उत्तरकर्म (अंतिम संस्कार) भी ताप्ती किनारे ही होते हैं — यह इस नदी के साथ जीवन-मृत्यु दोनों का संबंध दर्शाता है। साहित्यकार वल्लभ डोंगरे लिखते हैं: "ताप्ती अंचल का हर राम ताप्ती की गोद में जन्म लेता है, ताप्ती से प्रेम करता है और अंत में उसी में समाहित हो जाता है।"
विवाह में भी ताप्ती माँ का आशीर्वाद लिया जाता है। बैतूल, मुलताई, छिंदवाड़ा के पवार परिवारों में विवाह से पूर्व ताप्ती पूजन की परंपरा आज भी जीवित है।
माँ ताप्ती शोध संस्थान का योगदान
राजेश बारंगे पवार द्वारा स्थापित माँ ताप्ती शोध संस्थान, मुलताई, बैतूल — पवार समाज की सांस्कृतिक और भाषाई धरोहर को संरक्षित करने का अद्भुत प्रयास है। संस्थान के कार्य:
- पवारी/भोयरी भाषा पर वैज्ञानिक शोध (2026 में Bayesian Phylogeny और Acoustic Analysis)
- पवारी लोकगीतों का संग्रह और दस्तावेजीकरण
- पवार समाज के 72 गोत्रों का ऐतिहासिक शोध
- पवारी शोध पत्रिका का नियमित प्रकाशन
- सतपुड़ा क्षेत्र की ताप्ती संस्कृति का संरक्षण
💞 बैतूल-मुलताई-छिंदवाड़ा के पवार समाज से जुड़ें
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📚 शोध स्रोत (Research References)
- • राजेश बारंगे पवार — Founder & Director, माँ ताप्ती शोध संस्थान, मुलताई, बैतूल, MP | rajeshbarange.blogspot.com
- • वल्लभ डोंगरे — ताप्ती संस्कृति (ललित निबंध), सतपुड़ा संस्कृति संस्थान, भोपाल
- • पवारी शोध पत्रिका — Maa Tapti Shodh Sansthan, Multai, Betul, MP (2026 Special Issue)