📖 शोध आधार: यह लेख राजेश बारंगे पवार (माँ ताप्ती शोध संस्थान, मुलताई, बैतूल) के दशकों के शोध और 2026 में प्रकाशित पीयर-रिव्यूड पेपर्स पर आधारित है। संदर्भ: rajeshbarange.blogspot.com | Pawari Shodh Patrika
पवारी/भोयरी भाषा क्या है? (What is Pawari/Bhoyari?)
पवारी (Pawari) या भोयरी (Bhoyari) — यह एक ऐसी भाषा है जो इस दुनिया में केवल पवार/भोयर पवार/क्षत्रिय पवार समाज के लोगों द्वारा बोली जाती है। यह एक विशेष सामुदायिक भाषा (Community-Exclusive Language) है — भाषाविज्ञान में ऐसी भाषाएं बेहद दुर्लभ होती हैं।
भाषाविद् राजेश बारंगे पवार के अनुसार: "Bhoyari/Pawari (Satpuda Zone) possesses a rare sociolinguistic property: it is simultaneously geographically bounded and community-exclusive. No speakers of other castes or communities use Bhoyari/Pawari as a primary communicative code."
कहाँ बोली जाती है पवारी? (Geographic Distribution)
🗺️ पवारी/भोयरी का भौगोलिक क्षेत्र
🏆 प्रेस्टीज कोर (Prestige Core)
बैतूल–छिंदवाड़ा–पांढुर्णा त्रिभुज (MP)
यहाँ की पवारी सबसे प्रामाणिक और ध्वन्यात्मक रूप से संरक्षित है। समाज के विद्वान और बाहरी शोधकर्ता दोनों इसे पवारी का सबसे शुद्ध रूप मानते हैं।
🔗 सम्पर्क क्षेत्र (Contact Zone)
वर्धा (Maharashtra)
यहाँ पवारी में मराठी सम्पर्क का प्रभाव अधिक है। शब्दावली में मराठी उधार शब्द मिलते हैं, पर व्याकरणिक संरचना पवारी ही है।
पवारी भाषा का वैज्ञानिक वर्गीकरण
भाषाविज्ञान की दृष्टि से पवारी/भोयरी पश्चिमी भारत-आर्य (Western Indo-Aryan) परिवार की भाषा है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि पवार समाज को अक्सर मालवी क्षेत्र से जोड़ा जाता है, लेकिन भाषाई प्रमाण कुछ और कहता है:
| भाषा/बोली | परिवार | पवारी से दूरी | संबंध |
|---|---|---|---|
| Malvi (मालवी) | Western Indo-Aryan | D ≈ 0.12 Bark | अत्यंत निकट |
| Rangdi (रांगड़ी) | Western Indo-Aryan | D ≈ 0.18 Bark | निकट |
| Bundeli (बुंदेली) | Central Indo-Aryan | D ≈ 0.61 Bark | दूर |
| Rajasthani (राजस्थानी) | Western Indo-Aryan | मूल स्रोत | पूर्वज भाषा |
स्रोत: Acoustic Distance Modeling of Pawari (Bhoyari) Vowels — Rajesh Barange Pawar, Pawari Shodh Patrika, 2026 | DOI: 10.5281/zenodo.21602847
भोयरी भाषा का ऐतिहासिक उद्भव (~1300 CE)
"BEAST2 analysis estimates Bhoyari divergence from Core Rajasthani at a posterior mean of 700 years before present (≈ 1325 CE), with a 95% Highest Posterior Density interval of 575–825 BP (≈ 1200–1450 CE). Posterior node probability at the Proto-Bhoyari node is 0.92 — strong phylogenetic support."
सरल भाषा में: भोयरी/पवारी भाषा लगभग ~1300–1400 CE में Core Rajasthani से अलग हुई। यही वह काल है जब पवार समाज के पूर्वज मालवा/राजस्थान से सतपुड़ा क्षेत्र में प्रवास करने लगे थे। भाषा उनके साथ आई और धीरे-धीरे एक स्वतंत्र रूप ग्रहण करती गई।
🔬 तीन चरणों में भाषा विकास
- 📌 ~1300–1400 CE: Proto-Bhoyari founding — पवार पूर्वज सतपुड़ा में आने लगे, भाषा अलग होने लगी
- 📌 ~1500–1700 CE: Malwa contact phase — 250-300 वर्ष तक मालवी सम्पर्क, कुछ शब्द-ऋण हुए
- 📌 ~1700 CE के बाद: Satpuda stabilization — भाषा अपने वर्तमान स्थिर रूप में आई
पवारी भाषा की सात-स्वर प्रणाली (7-Vowel System)
2026 के एक अत्याधुनिक ध्वनि-वैज्ञानिक अध्ययन में बैतूल क्षेत्र के 8 मूल पवारी वक्ताओं के भाषण का विश्लेषण Praat सॉफ्टवेयर से किया गया। परिणाम:
- पवारी में 7 अलग-अलग स्वर हैं: /i e ə a ɔ o u/
- 94.1% की Discriminant Function Accuracy — स्वर इतने स्पष्ट हैं कि कंप्यूटर भी उन्हें लगभग पूरी तरह पहचान सकता है
- Vowel Dispersion Index (VDI) = 4.21 Bark — अत्यंत उच्च आंतरिक विविधता
पवारी लोकगीत — भाषा की आत्मा
पवारी भाषा की सबसे जीवंत अभिव्यक्ति है इसके लोकगीत (Lokgeet)। विवाह, त्योहार, फसल और पूजा के अवसरों पर गाए जाने वाले पवारी लोकगीत इस भाषा को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे ले जाते हैं। माँ ताप्ती शोध संस्थान, मुलताई इन लोकगीतों का संग्रह और संरक्षण करता है।
💞 परंपरा और आधुनिकता का मिलन — ParamSaathi पर
पवारी बोलने वाला, अपनी संस्कृति से जुड़ा जीवनसाथी खोज रहे हैं? ParamSaathi पर बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, वर्धा और अन्य सभी क्षेत्रों के पवार समाज के लोग जुड़े हैं।
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पवारी और भोयरी में क्या अंतर है?
दोनों एक ही भाषा के दो नाम हैं। 'भोयरी' नाम भोयर/भोयर पवार समुदाय के संदर्भ में आता है, जबकि 'पवारी' समाज के व्यापक नाम पवार से। भाषाई दृष्टि से दोनों एक ही हैं।
क्या पवारी एक अलग भाषा है या मालवी की बोली?
परंपरागत रूप से इसे मालवी की उपबोली माना जाता था। लेकिन 2026 के Bayesian Phylogenetic शोध ने सिद्ध किया है कि पवारी सीधे राजस्थानी से निकली है (न कि मालवी से)। इसकी मालवी से समानता सम्पर्क का परिणाम है, न कि वंश-सम्बन्ध की।
पवारी भाषा कितने लोग बोलते हैं?
पवारी केवल पवार/भोयर पवार समाज के लोग बोलते हैं, जो बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा (MP) और वर्धा (Maharashtra) क्षेत्र में मुख्यतः निवास करते हैं। यह एक geographically bounded और community-exclusive भाषा है।
पवारी भाषा का शोध कौन करता है?
राजेश बारंगे पवार (Founder & Director, माँ ताप्ती शोध संस्थान, मुलताई, बैतूल) और उनके सहयोगी पवारी भाषा, इतिहास और 72 गोत्रों पर दशकों से शोध कर रहे हैं। उनका ब्लॉग: rajeshbarange.blogspot.com
📚 शोध स्रोत (Research References)
- • Acoustic Distance Modeling of Pawari (Bhoyari) Vowels: A Formant-Based Phonetic Analysis of Satpuda Pawari (Bhoyari) — Rajesh Barange Pawar, Pranay Chopde, Rajesh Bobde Pawar. Pawari Shodh Patrika (Special Issue), Paper AS-3, 2026. DOI: 10.5281/zenodo.21602847. Published by Maa Tapti Shodh Sansthan, Multai, Betul, MP.
- • Bayesian Time-Calibrated Phylogeny of Bhoyari (Pawari): BEAST2, PPC and ABC Evidence for Rajasthani Origin — Shivani Barange Pawar, Rajesh Barange Pawar, Pranay Chopde. Pawari Shodh Patrika, Study U-1, 2026. ISBN: 978-620-9-62547-3. Published by Maa Tapti Shodh Sansthan, Multai, Betul, MP.
- • Blog: rajeshbarange.blogspot.com — Chief Editor: Rajesh Barange Pawar
ParamSaathi is grateful to Rajesh Barange Pawar and team for their pioneering research on Bhoyari/Pawari language and Pawar community history.